Friday, January 20

बलूचिस्तान के हिंगलाज माता मंदिर को बचाने के लिए दे चुके हैं कई बलूच कुर्बानी

बलूचिस्तान के हिंगलाज माता मंदिर को बचाने के लिए दे चुके हैं कई बलूच कुर्बानी

नई दिल्ली। बलूचिस्तान, पाकिस्तान का वो इलाका जो अपने ही हुक्मरानों के जुल्म का शिकार है। जहां के कुदरती खजाने को पाकिस्तान ने जम कर लूटा लेकिन बदले में यहां के बाशिंदों को जुल्म मिलता है। इस सौतेले बर्ताव से बलोच लोग आजादी चाहते हैं। भारत का साथ चाहने वाले बलोच नेताओं की उम्मीदों को तब पंख लग गए जब आजादी की 70वीं सालगिरह के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने बलूचिस्तान ही नहीं, ऐसे हर इलाके का जिक्र किया, जिसे पाकिस्तान ने ताकत के दम पर दबा रखा है।

बलूचिस्तान की जमीन पर दुर्गम पहाड़ियों के बीच  हिंगलाज माता का मंदिर बसा है। 51 शक्ति पीठ में सबसे प्रमुख है शक्तिपीठ। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक यहां सती का सिर गिरा था। इसके बावजूद भारत में भक्त हिंगलाज शक्ति पीठ के दर्शन के लिए तरसते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के बाद दुनिया का ध्यान यहां हो रहे जुल्मो-सितम पर गया हैबलोच नेता अपनी तकलीफ दुनिया के सामने आने पर खुश हैं। उनका कहना है कि भारत को इसलिए भी बलोच लोगों की मदद करनी चाहिए क्योंकि दोनों जगह के लोगों का रिश्ता बहुत पुराना-बहुत प्राचीन है।

भारत के करोड़ो हिंदुओं के लिए बलूचिस्तान का एक मंदिर श्रद्धा का केंद्र है। दुर्गम पहाड़ों के बीच ये मंदिर है हिंगलाज भवानी का शक्तिपीठ। बलूचिस्तान में इसे नानी के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। पाकिस्तान के कट्टरपंथियों की आंख में भले ही ये किरकिरी की तरह चुभता हो लेकिन स्थानीय बलोच लोग इसे बहुत आदर देते हैं। पाकिस्तानी मूल के लेखक तारेक फतेह तो ये भी दावा करते हैं कि मंदिर को बचाने के लिए बलोच लोगों ने कुर्बानियां भी दी हैं।

हिंगलाज देवी या नानी का मंदिर, कराची के पश्चिम में 250 किलोमीटर दूर हिंगोल नदी के किनारे स्थित है। सूना सा दिखने वाला ये शक्तिस्थल भारत में होता तो यकीन मानिए यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा होता, क्योंकि इसकी कथा भगवान शिव की पत्नी सती से जुड़ी हुई है। इस कथा के अनुसार अपने पिता के द्वारा शिव का अपमान होने पर सती ने यज्ञकुंड में कूद कर जान दे दी थी। इस पर नाराज शिव सती के शरीर लेकर सारे लोकों को तहस-नहस करने निकल पड़े। उनका गुस्सा शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने सती के 51 टुकडे कर दिए। जिन स्थानों पर सती के अंग गिरे वे शक्तिपीठ कहलाए।

मान्यता है कि सती का सिर हिंगोल नदी के किनारे हिंगलाज में गिरा था, इसीलिए ये सबसे प्रमुख शक्ति पीठ है। हिंगलाज देवी को पांडवों और छत्रियों की कुलदेवी के रूप में भी जाना जाता है। हर साल यहां 22 अप्रैल से हिंगलाज तीर्थ यात्रा होती है, इसमें गिने-चुने तीर्थयात्री भारत से भी पहुंचते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पाकिस्तान से वीजा मिल पाता है। ज्यादातर भीड़ पाकिस्तान के थरपारकर जिले से आती है, जहां सबसे ज्यादा हिंदू आबादी है। तीर्थयात्रा के पहले चरण में श्रद्धालु 300 फुट ऊंचे ज्वालामुखी शिखर पर-चंद्र गूप ताल के दर्शन करते हैं। इस ताल का रिश्ता भगवान राम से भी बताया जाता है।

चंद्र गूप ताल की भभूत लेने के बाद श्रद्धालु ज्वालामुखी शिखर से नीचे उतर कर, 35 किमी दूर किर्थार पहाड़ों की तलहटी में स्थित मुख्य हिंगलाज देवी मंदिर के दर्शन करते हैं। माना जाता है कि इस शक्ति पीठ के दर्शन किए बगैर किसी भी हिंदू तीर्थ का दर्शन पूरा नहीं होता है।

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