Monday, May 22

जो काम पाकिस्तान 21 साल तक नहीं कर सका उसे भारत ने चुटकी में कर दिखाया…

1971 में हुए भारत-पाक युद्ध के में भारत की जीत के बाद भारत ने पाकिस्तान के कुछ इलाके में औपचारिक रूप से कब्ज़ा कर लिया था. ये युद्ध  3 दिसंबर से 16 दिसंबर तक चली थी.आपको बता दें कि भारत-पाक युद्ध में हमारी जीत का औपचारिक ऐलान आज के ही दिन हुआ था.

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इस युद्ध के आखिरी रात पाकिस्तान के 2 गांवों के लोगों की कहानी किसी सपने से कम नहीं है. जरा सोचिये कैसा लगा होगा जब युद्ध के दौरान लोग सोए तो पाकिस्तान में थे लेकिन अगली सुबह चारपाई से उठे तो भारत में थें. ये कहानी  28 हजार फीट ऊंचाई पर दुनिया के दूसरे सबसे ऊंचे पहाड़ कराकोरम के करीब बसे एक दो गाँव की हैं. 1971 युद्ध में इंडियन आर्मी ने रातों-रात पाकिस्तान के इन गांवों पर कब्जा कर लिया था. दैनिक भारत के खबर के अनुसार  जब  सुबह-सुबह भारतीय सेना के जवान लोगों को चाय देने आए तब उन्हें  पता चला कि वो पाकिस्तान से भारत में आ गए हैं.

 

फिलहाल लेह में आने वाले ये दोनों गांव (टुरटुक और तयाशी) उन दिनों पाकिस्तान के बाल्टिस्तान में आते थे. इनमें से टुरटुक पर लेह में मौजूद भारतीय सेना के मेजर चेवांग रिनचेन ने 14 दिसंबर की रात करीब 10 बजे कब्जे का प्लान बनाया.

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उस वक़्त वहां ठंड का अस्तर -20 डिग्री सेल्सियस था. बावजूद इसके मेजर रिनचेन ने अपने 100 जवानों के साथ नदी के रास्ते  पहाड़ पार कर टुरटुक गाँव पर कब्जा करने की योजना बनाई. वहां ठंड इतनी ज्यादा थी कि पीने का पानी भी जम जा रहा था। इसलिए जवानों ने पानी की बोतल में रम मिलाई और पीते हुए पहाड़ की ओर चल दिए. उस दौरान पाकिस्तान सेना पूर्वी पाकिस्तान में चल रहे युद्ध में बाल्टिस्तान से सटे भारत-पाक सीमा पर सेना ना के बराबर थी. जिसका फायदा उठाते हुए 4-5 घंटे में ही मेजर रिनचेन ने टुरटुक गांव पर कब्जा कर लिया. केवल इतना ही नहीं, इस दौरान में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के 13 हजार स्केवयर किमी तक के क्षेत्र पर भी कब्जा किया था.

 

कब्जे वाली रात मौजूद फातिमा बानो कहती हैं कि दिसंबर में हमले वाले महीने में ही उनका निकाह हुआ था. कब्जे की रात वो अपने मायके में थीं और फिर सुबह उनका गांव इंडिया में आने से पति से अलग हो गईं. काफी प्रयास के बाद ना तो  वो वापस पाकिस्तान जा पाईं और ना ही उनके शौहर भारत आ सकें. थक हारकर दोनों ने एक दूसरे को तलाक दे दिया. और दूसरी शादी कर ली. फिलहाल अब इंडिया में रहकर वे बहुत खुश हैं.

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 83 वर्षिय नुसरत ने dainikbhaskar.com से बात-चीत के दौरान बताया कि जब भारत ने टुरटुक गाँव पर कब्ज़ा किया था तब वो 38 साल की थीं. उन्होंने  बताया कि टुरटुक गांव 21 साल पाकिस्तान में रहा लेकिन यहाँ स्कूल से लेकर हेल्थ सेंटर तक पहली बार यहां इंडिया के कब्जे के बाद ही बने. पाकिस्तान ने 21 सालों में गांव को कुछ नहीं दिया और इंडिया ने 1971 में कब्जे से अब तक कई स्कूल और हेल्थ सेंटर बन चुके हैं साथ ही 1000 से ज्यादा लोगों को नौकरी, बिजनेस का भी विकल्प मिला है.

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