Friday, January 20

इतिहास

History

चाणक्य नीति-पुरुषों को विवाह करते समय स्त्रियों के इन गुणों को ध्यान में रखना चाहिए !

चाणक्य नीति-पुरुषों को विवाह करते समय स्त्रियों के इन गुणों को ध्यान में रखना चाहिए !

इतिहास
कौन थे आचार्य चाणक्य ? गुरु चाणक्य अर्थशास्त्र के आचार्य थे l अर्थशास्त्र के साथ-साथ गुरु चाणक्य अपने शिष्यों को राजनीति और कूटनीति की शिक्षा भी दिया करते थे l अपनी कूटनीतियों की वजह से आचार्य चाणक्य ने सिकंदर को भारत छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था l एक सामान्य बच्चे चन्द्रगुप्त को ‘सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य’ बनाने में चाणक्य जी ने अहम भुमिका निभाई थी l चाणक्य ने ‘नीति शास्त्र’ की रचना की थी जिसमें बताया गया है कि अपने जीवन को सरम, सुगम और सुखी कैसे बनाया जा सकता है l नीति श्लोक वरयेत् कुलजां प्राज्ञो विरूपामपि कन्यकाम्। रूपशीलां न नीचस्य विवाह: सदृशे कुले।। आचार्य की नीतियों के अनुसार एक समझदार पुरुष वही है जो किसी स्त्री की बाहरी सुन्दरता से नहीं बल्कि उसके गुणों से प्रभावित होता है l जो पुरुष सिर्फ स्त्री की बाहरी सुन्दरता से आकर्षित होकर विवाह कर लेता है वो अपने वैवाहिक जी
जब पाकिस्तानी पीएम ने माँगा भारत के प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से कश्मीर.. मिला था ये जबाव

जब पाकिस्तानी पीएम ने माँगा भारत के प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से कश्मीर.. मिला था ये जबाव

इतिहास
बात वर्ष 1990 के मालदीव मे सार्क सम्मलेन की है। 21 नवम्बर से 23 नवम्बर के बीच चले इस सम्मलेन मे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भी भाग लिया था। भारत का प्रतिनिधित्व उस समय भारत के प्रधानमन्त्री चद्रशेखर कर रहे थे। नवाज शरीफ तब पहली बार पकिस्तान के प्रधानमन्त्री बने थे और चंद्रशेखर पहली बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में चुने गए थे। कश्मीर तब आतंकवाद की आग मे झुलस रहा था और लाखों कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से खदेड़ दिया गया था। यहाँ तक की आतंकवादियों ने तब के गृहमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद की बेटी का अपहरण भी कर लिया था। चंद्रशेखर कोई चार महीने प्रधानमंत्री रहे और आम चुनाव और उसके दौरान राजीव गांधी के दुखद निधन के कारण चार महीने उन्हें और काम चलाना पड़ा। लेकिन इस बीच वे सार्क सम्मेलन में माले गए जहां उनकी मुलाकात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से हुई। चंद्रशेखर इस मुलाकात में हु
जो काम पाकिस्तान 21 साल तक नहीं कर सका उसे भारत ने चुटकी में कर दिखाया…

जो काम पाकिस्तान 21 साल तक नहीं कर सका उसे भारत ने चुटकी में कर दिखाया…

इतिहास
1971 में हुए भारत-पाक युद्ध के में भारत की जीत के बाद भारत ने पाकिस्तान के कुछ इलाके में औपचारिक रूप से कब्ज़ा कर लिया था. ये युद्ध  3 दिसंबर से 16 दिसंबर तक चली थी.आपको बता दें कि भारत-पाक युद्ध में हमारी जीत का औपचारिक ऐलान आज के ही दिन हुआ था. Source इस युद्ध के आखिरी रात पाकिस्तान के 2 गांवों के लोगों की कहानी किसी सपने से कम नहीं है. जरा सोचिये कैसा लगा होगा जब युद्ध के दौरान लोग सोए तो पाकिस्तान में थे लेकिन अगली सुबह चारपाई से उठे तो भारत में थें. ये कहानी  28 हजार फीट ऊंचाई पर दुनिया के दूसरे सबसे ऊंचे पहाड़ कराकोरम के करीब बसे एक दो गाँव की हैं. 1971 युद्ध में इंडियन आर्मी ने रातों-रात पाकिस्तान के इन गांवों पर कब्जा कर लिया था. दैनिक भारत के खबर के अनुसार  जब  सुबह-सुबह भारतीय सेना के जवान लोगों को चाय देने आए तब उन्हें  पता चला कि वो पाकिस्तान से भारत में आ गए हैं. &

औरंगजेब की दमनकारी नीतियों के विरोध में इस वीर ने खोद डाली थी अकबर की समाधि,

इतिहास
अकबर का मकबरा मुघलो के लिए सम्मान का प्रतिक था..लेकिन एक ऐसा वीर था जिसने ओरंगजेब की दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए मुघलो के उस सम्मानित प्रतिक को नुक्सान पहुचाया था…वीर राजाराम जाट ने अकबर के मकबरे को नुक्सान पहुंचाकर उसमे से अकबर की अस्थियाँ निकाली थी और उनको जला दिया था.. जानिये राजाराम के बारे में  बादशाह औरंगजेब की हिन्दू धर्म विरोधी नीति व मथुरा व वृन्दावन के देवमन्दिरों को ध्वस्त करने के चलते उत्तेजित जाटों ने गोकुला के नेतृत्व में संगठित होकर स्थानीय मुग़ल सेनाधिकारियों से डटकर मुकाबला किया था | उनसे लड़ते हुए अनेक मुग़ल मनसबदार मारे गए | जाटों ने गांवों का लगान देना बंद कर दिया | मुग़ल सेना से लड़ते हुए गोकुला के मारे जाने पर सिनसिनी गांव के चौधरी भज्जाराम के पुत्र राजाराम जो अप्रतिम वीर एवं योद्धा था ने उस विद्रोह का नेतृत्व संभाला | राजाराम ने बादशाह के खा

इस तश्वीर के पीछे का इतिहास जानकार चौक जाएंगे आप …

इतिहास
महाराणा प्रताप ने एक ही वार में इस मुग़ल सरदार के दो टुकड़े कर दिए थे.. महाराणा प्रताप की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की उन्होंने मुग़ल सेनापति बहलोल खान को घोड़े सहित युद्ध में एक ही वार में दो हिस्सों में काट डाला था । हल्दीघाटी के युद्ध में मुग़ल सेना के सेनापति कुवंर मानसिंह के हाथी के आगे युद्ध के मध्य भाग के रक्षकों में मुग़ल बहलोल खा इराकी अश्व पर चढ़ा खड़ा था . उस के मस्तक पर लोहे का टोप (सिरस्त्रान) था. लोह जडित कड़ियों से बना कवच पहने हुए वह लोह जंजीरों से बनी पाखर (झूल )से सज्जित घोड़े पर सवार था. अपने चेतक अश्व को प्रबल वेग से दोडते हुए राणा को समीप आता देखकर बहलोल ने उसे युधार्थ ललकारा . राणा ने चेतक को उठा कर बहलोल के मस्तक पर तलवार का ऐसा प्रहार किया जो खान के टोप युक्त मस्तक को काटती कवच युक्त देह यस्ती को चीरती राणा की तलवार पाखर सहित उस के घोड़े को भी चीरकर आरप

भारत के नेपोलियन बोनापार्ट यशवंतराव होळकर , जिन्होंने अंग्रेजो के साथ कभी समझौता नहीं किया

इतिहास
  यह एक पत्र का अंश है, जो एक अंग्रेज जनरल ने अपने अधिकारियों को लिखा था। ये पंक्तियां यशवंतराव के शौर्य-गाथा को परिभाषित करती हैं। यशवंतराव एक ऐसे भारतीय शासक थे, जिन्होंने अकेले दम पर अंग्रेजों को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था। हालत यह थी कि अंग्रेज हर हाल में बिना शर्त समझौता करने को तैयार थे। यशवंतराव होलकर को अपनों ने ही बार-बार धोखा दिया, इसके बावजूद वे जंग के मैदान से कभी पीछे नहीं हटे। यशवंतराव होलकर विश्व के महान शासकों में से एक थे, इसके बावजूद वे इतिहास के पन्नों में जैसे खो गए हैं। अचरज की बात यह है कि आज भी लोगों को उनके बारे में नहीं पता। इतिहासकार एन एस इनामदार ने यशवंतराव की तुलना नेपोलियन बोनापार्ट से की है। यशवंतराव होलकर का जन्म वर्ष 1776 में हुआ था। होलकर के बड़े भाई को ग्वालियर के शासक दौलतराव सिंधिया ने छल से मरवा दिया था। इसके बाद पश्चिम मध्य

आचार्य चाणक्य ने कैसे पहले हिन्दू साम्राज्य की स्थापना की , सुनिए पाकिस्तानी मीडिया की जुबानी

इतिहास
आचार्य चाणक्य का नाम भारत में कौन नहीं जानता लेकिन आपको हैरानी होगी की पाकिस्तान में भी चाणक्य नित्ती की तारीफ होती है ना सिर्फ तारीफ होती बल्कि चाणक्य ने कैसे हिन्दुस्थान को अखण्ड बनाया इसकी पूरा विवरण सुनिए.

भारतीय समाज, इतिहास और राजनीति के कुछ ऐसे किस्से जिनसे आप आज तक अंजान है

इतिहास
भारतीय समाज, इतिहास और राजनीति के कुछ ऐसे किस्से जिन्हे कुछ लोग बहुत ही मजबूती और विश्वास के साथ कहते और मानते है तो कुछ लोग इसे केवल मिथ्या और सरासर अफवाह तथा गलत मानते है। अब आप भी पढ़िए इन किस्सों के बारे में और खुद फैसला कीजिए यह सही है या गलत ? फैसला आप अपने विवेक और समझदारी से खुद कीजिए 1] सीआईए ने नंदा देवी की चोटी पर एक नयूक्यलीयर डिवाइस लगाई थी जो गायब हो गई और दुबारा मिली ही नहीं ऐसा कहा जाता है कि 1965 में अमेरिकी सीक्रेट सर्विस सीआईए के लोगों ने इंडिया की दूसरी सबसे बड़ी छोटी नंदा देवी पर एक न्यूक्लियर डिवाइस लगाने का प्लान बनाया। लेकिन जब टीम उसे वहां लगाने पहुंची तब मौसम खराब हो गया था। टीम को डिवाइस छोड़ कर वहां से निकलना पड़ा। और जब मौसम बाद में सुधरा तो वो फिर वापस लौटे। लेकिन उन्हें उस डिवाइस का कुछ पता नहीं चला। और आज तक किसी को पता नहीं, उसका हुआ क्या! 2] सिर्फ अजहर

मुगलो के इस सबसे बड़े दुश्मन को सम्मानित करेंगे मोदी।

इतिहास
सिख योद्धा बाबा बंदा सिंह बहादुर के 300वें शहीदी दिवस के अवसर पर आज (रविवार) दिल्ली में आयोजित हो रहे कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिस्सा लेंगे।बाबा बंदा सिंह बहादुर पर जारी सिक्के पीएम मोदी और पंजाब के सीएम को भेंट किये जाएंगे। इस अवसर पर पीएम बाबा बंदा सिंह बहादुर जी पर एक किताब और स्मारिका रिलीज करेंगे। साथ पीएम कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित भी करेंगे। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बाबा बंदा सिंह बहादुर के 300वां शहीदी दिवस को यादगार बनाने लिए 21 जून को चांदी का सिक्का जारी किया था। कौन थे बंदा सिंह बहादुर  ? बाबा बन्दा सिंह बहादुर का जन्म कश्मीर स्थित पुंछ जिले के राजौरी क्षेत्र में 1670 ई. तदनुसार विक्रम संवत् 1727, कार्तिक शुक्ल 13 को हुआ था। वह राजपूतों के भारद्वाज गोत्र से सम्बद्ध था और उसका वास्तविक नाम लक्ष्मणदेव था।5 वर्ष की उम्र में वह जानकीप्रस

21 सिख जवान और सामने 10000 अफगान पठान …..आखिरी आदमी, आखिरी गोली

इतिहास
आज हम इतिहास की इस सबसे महान जंग पर प्रकाश डालेंगे, जिससे हमें एक बार फिर ‘राष्ट्र रक्षक’ सिखों के पराक्रम पर गर्व महसूस हो सके।  ‘सरागढ़ी’ पश्चिमोत्तर सीमांत (अब पाकिस्तान) में स्थित हिंदुकुश पर्वतमाला की समाना श्रृंखला पर स्थित एक छोटा सा गांव है। लगभग 119 पहले हुई एक जंग में सिख सैनिकों के अपरिमित शौर्य और साहस ने इस गांव को दुनिया के नक़्शे में एक महत्वपूर्ण स्थान के रूप में चिन्हित कर दिया।  ब्रिटिश शासनकाल में 36 सिख रेजीमेंट जो की ‘वीरता’ का पर्याय मानी जाती थी,’सरगढ़ी’ चौकी पर तैनात थी। यह चौकी रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण गुलिस्तान और लाकहार्ट के किले के बीच में स्थित थी।