Sunday, January 22

इतिहास

History

ऐसा राजा जिसने अरब तुर्क आक्रमणकारियों को भागने पर विवश कर दिया , जिसके युग में भारत सोने की चिड़िया कहलाया

इतिहास
मित्रों प्रतिहार/पड़िहार क्षत्रिय राजपूत वंश के नवमीं शताब्दी में सम्राट मिहिर भोज भारत का सबसे महान शासक था। उसका साम्राज्य आकार, व्यवस्था , प्रशासन और नागरिको की धार्मिक स्वतंत्रता के लिए चक्रवर्ती गुप्त सम्राटो के समकक्ष सर्वोत्कृष्ट था। भारतीय संस्कृति के शत्रु मुस्लिम तुर्को -अरबो को पराजित ही नहीं किया अपितु उन्हें इतना भयाक्रांत कर दिया था की वे आगे आने वाली एक शताब्दी तक भारत की और आँख उठाकर देखने का भी साहस नहीं कर सके। चुम्बकीय व्यक्तित्व संपन्न सम्राट मिहिर भोज की बड़ी बड़ी भुजाये एवं विशाल नेत्र लोगों में सहज ही प्रभाव एवं आकर्षण पैदा करते थे। वह महान धार्मिक , प्रबल पराक्रमी , प्रतापी , राजनीति निपुण , महान कूटनीतिज्ञ , उच्च संगठक सुयोग्य प्रशासक , लोककल्याणरंजक तथा भारतीय संस्कृति का निष्ठावान शासक था। ऐसा राजा जिसका साम्राज्य संसार में सबसे शक्तिशाली था। इनके साम्राज्य म

भारत में गुलामी की निशानी, इसके लिए ब्रिटेन आज भी वसूलता है लगान

इतिहास
भारत 70वें स्वतंत्रता वर्ष में प्रवेश कर रहा है। अंग्रेजों को भारत छोड़े तकरीबन 69 साल हो गए लेकिन आज भी गुलामी की एक निशानी हमारे देश में मौजूद है। आज भी एक रेलवे ट्रैक ब्रिटेन के कब्जे में है। नैरो गेज (छोटी लाइन) के इस ट्रैक का इस्तेमाल करने वाली इंडियन रेलवे हर साल एक करोड़ 20 लाख की रॉयल्टी ब्रिटेन की एक प्राइवेट कंपनी को देनी पड़ती है। इस ट्रैक पर सिर्फ एक ट्रेन … – इस रेल ट्रैक पर शकुंतला एक्सप्रेस के नाम से सिर्फ एक पैसेंजर ट्रेन चलती है। – अमरावती से मुर्तजापुर के 189 किलोमीटर के इस सफर को यह 6-7 घंटे में पूरा करती है। – अपने इस सफर में शकुंतला एक्सप्रेस अचलपुर, यवतमाल समेत 17 छोटे-बड़े स्टेशनों पर रुकती है। – 100 साल पुरानी 5 डिब्बों की इस ट्रेन को 70 साल तक स्टीम का इंजन खींचता था। इसे 1921 में ब्रिटेन के मैनचेस्टर में बनाया गया था। – 15 अप्रैल 1994 को शकुंतला एक्प्रेस के स

छपरा में मिला रामायण का जटायु, देखने के लिए लोगों की उमड़ी भीड़

इतिहास
PATNA: छपरा के रसूलपुर थाना क्षेत्र के अतरसन गांव में करीब 30 किलोग्राम वजन और दो मीटर लम्बे पंखों वाला जटायु मिला है। इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी है। जटायु जाति के इस गिद्ध को फिलहाल अतरसन पंचायत के पूर्व मुखिया मदारीचक गांव निवासी रंजीत यादव के संरक्षण में रखा गया है। ग्रामीण सुधाकर यादव ने बताया कि अतरसन गांव के पोखर के पास ये जटायु इमरान खान को मिला। ये उड़ नहीं सकता था। डॉ  इस विशालकाय पक्षी की देख-रेख में लगे हैं। बीडीसी सोनू यादव ने बताया कि वन विभाग को सूचना दे दी गई है। जटायु बहुत ही विशाल पक्षी होता है।