‘सौ साल भेड़ की तरह जीने से अच्छा एक दिन शेर की तरह… LAC पर चीन को इंडियन आर्मी का यह मेसेज

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ईटानगर: चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव के बीच आईटीबीपी का एक साइनबोर्ड सुर्खियां बटोर रहा है। इस साइनबोर्ड पर लिखा एक कथन भारतीय सैनिकों को फौलादी जिगर और साहस को बयां करता है। अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर पर एलएसी से सटी आईटीबीपी की अग्रणी चौकी पर लगे साइनबोर्ड में लिखा है, It is better to live one day as Lion than a hundred years as sheep यानी जिंदगी भर भेड़ की तरह जीने से बेहतर है एक दिन शेर की तरह जीना।

यह कथन भारत को गुलाम बनाने वाली ईस्ट इंडिया कंपनी से आखिरी सांस तक लड़ने वाले मैसूर के शासक टीपू सुल्तान ने खुद के लिए कहा था। यूं तो आईटीबीपी चौकी पर लगा यह साइनबोर्ड काफी पुराना है लेकिन चीन के साथ जारी तनाव के बीच यह कथन दुश्मन देश को आंख दिखाने जैसा है।

चीन की हर हरकत को माकूल जवाब
एएलसी के नजदीक पिछले 7 महीने से भारतीय सैनिक डटे हुए हैं और चीन की हर कायराना हरकत का माकूल जवाब दे रहे हैं। बेहद सर्द मौसम में कठिनाइयों के बीच भी सैनिकों का हौसला कम नहीं हुआ है।

याक के जरिये जरूरी सामान की ढुलाई
सैनिकों के लिए पहाड़ी जानवर याक बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं जिनके जरिए ऊंचे और दुर्गम स्थानों तक सैन्य टुकड़ियों को ईधन पहुंचाया जा रहा है। तवांग सेक्टर में आईटीबीपी चौकी में तैनात एक जवान ने बताया कि 90 किलो वजन तक की ढुलाई कर सकते हैं।

अरुणाचल के तवांग सेक्टर में LAC पर आईटीबीपी के जवान पूरी तरह से मुस्तैद हैं। आईटीबीपी के कमांडर ने बताया कि जब लद्दाख जैसी घटनाएं होती हैं तो हमें हाई अलर्ट पर रहना होता है, जिससे अचानक से ऐसी घटना ना हो जाए।

55वीं बटैलियन के कमांडर कमांडेट आई. बी. झा ने कहा- देश को हमारा आश्वासन है कि मातृभूमि पर किसी भी तरह की आंच नहीं आने देंगे। इसके लिए जवानों में जोश है। हम पूरी तरह से तैयार हैं।

कमांडेंट ने बताया कि जब लद्दाख में आईटीबीपी के जवानों ने जमकर लोहा लिया, तो यहां के जवानों के मन में आया कि उन्हें मौका मिल गया और हमें नहीं मिल पाया। तैयारी इस लेवल की है कि यहां जवान मौके की तलाश में हैं, जिससे रणभूमि में अपनी बहादुरी दिखा सकें।

एएलसी के नजदीक पिछले 7 महीने से भारतीय सैनिक डटे हुए हैं और चीन की हर कायराना हरकत का माकूल जवाब दे रहे हैं। बेहद सर्द मौसम में कठिनाइयों के बीच भी सैनिकों का हौसला कम नहीं हुआ है। याक के जरिए ऊंचे और दुर्गम स्थानों तक सैन्य टुकड़ियों को ईधन पहुंचाया जा रहा है।

इस साल मई और जून के समय में लद्दाख के पैंगॉन्ग झील के पास चीन की तरफ से हुए अतिक्रमण के बाद स्थिति बेहद गंभीर हो चली थी। दोनों देशों के सैनिकों के बीच हाथापाई भी हुई, जिसमें जवान हताहत भी हुए थे। चीन ले लगती लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक की सीमा पर जवान डटे हुए हैं।

15,500 फीट ऊंचाई पर ठहरे हैं जवान
आईटीबीपी जवान ने बताया, ‘हम 15,500 फीट ऊंचाई पर स्थित अग्रणी चौकियों में ठहरे सैनिकों के लिए ईधन जैसे जरूरी सप्लाइ कर रहे हैं। इसके लिए हम याक का इस्तेमाल करते हैं। याक की खासियत है कि ये खड़े पहाड़ों पर 90 किलो वजन के साथ चढ़ सकते हैं।’

जल्द होगी अगले दौर की बातचीत
बता दें कि एलएसी पर भारत और चीन के बीच तनाव अभी समाप्त नहीं हुआ है। दोनों देशों ने मौजूदा द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल्स के मुताबिक, पूर्वी लद्दाख में LAC से सैनिकों के जल्दी और पूरी तरह डिसइंगेजमेंट के लिए अगले दौर की सैन्य स्तर की बातचीत पर सहमति जताई है। सीमा विवाद को लेकर आखिरी बातचीत 18 दिसंबर को संपन्न हुई थी।

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